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दही–पनीर में ‘हेराफेरी’ का खुला खेल, फूड एंड सेफ्टी विभाग की भूमिका कटघरे में…?


रायगढ़।शहर के कयाघाट रपटा के पास पिकअप वाहन में दही और पनीर के डब्बों की ब्रांडिंग बदलने का जो मामला सामने आया है, उसने खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की कथित जांच को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है, सवाल यह नहीं कि गड़बड़ी हुई, सवाल यह है कि गड़बड़ी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई…?


जिस डेयरी में संदिग्ध दही और पनीर ले जाया जा रहा था, उसे रातों-रात उसी डेयरी के हवाले कर दिया गया, हैरानी की बात यह है कि अगली सुबह जांच टीम कस्तूरी डेयरी, केलो विहार पहुंची, और तथाकथित जांच के नाम पर दरवाजे बंद कर दिए गए। क्या यह जांच थी, या सबूत मिटाने का मौका…?
सबसे गंभीर और शर्मनाक तथ्य यह है कि फूड एंड सेफ्टी विभाग के पास सैंपल लेने के लिए खुद का कंटेनर तक मौजूद नहीं था,मजबूरी में दूसरी डेयरी से कंटेनर मंगवाकर सैंपलिंग की गई,ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह सैंपलिंग निष्पक्ष थी,या पहले से तय स्क्रिप्ट का हिस्सा…..?


गुरुवार को खुलेआम पिकअप वाहन में लोड दही और पनीर के डब्बों से नंदनम कंपनी के स्टीकर हटाकर उन पर वैध फुड के स्टीकर लगाए जा रहे थे,यह पूरा खेल सबकी आंखों के सामने चलता रहा, लेकिन फूड एंड सेफ्टी विभाग की टीम या तो बेखबर रही या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा करती रही,
इस पूरे मामले में सीएमएचओ अनिल कुमार जगत का बयान भी सवालों के घेरे में है,उनका कहना है कि सैंपलिंग कर ली गई है, और रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी, वहीं ब्रांड बदलने के मामले में प्रकरण दर्ज करने की बात कही जा रही है,लेकिन सवाल यह है कि जब अपराध मौके पर पकड़ा गया, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई…..?


शहर में यह अवैध कारोबार कब से फल-फूल रहा है….? क्या फूड एंड सेफ्टी विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर यह सब उनकी सहमति से चल रहा था….? अगर आज एक मामला सामने आया है तो यह मानना गलत नहीं होगा कि शहर में ऐसी कई और डेयरियां और कंपनियां इसी तरह जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही हैं।

यह सिर्फ दही–पनीर की बात नहीं है, यह आम जनता की सेहत से सीधा धोखा है, अधिकारी शायद यह भूल गए हैं कि जो ज़हरीला या मिलावटी सामान जनता खा रही है, वही उनके घरों तक भी पहुंच सकता है।


अगर जनता की सेहत की रक्षा नहीं कर सकते तो फिर ऐसे विभाग और ऐसी जांच का क्या मतलब…..?
अब सवाल उठ चुका है —क्या इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति होगी या फिर सच में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?